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नेशनल हाईवे पर अक्सर करते हैं ड्राइविंग तो ये खबर है आपके काम की, मुसीबतों से बचाएगी App

ऐप उन लोगों के लिए है जो लगातार हाईवे पर वाहन चलाते हैं. जैसे ही चालक नेशनल हाईवे पर पहुंचता है तो ये ऐप एसएमएस के द्वारा टोल प्लाज़ा पर लगने वाला समय और टोल शुल्क की जानकारी मुहैया कराता है.

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सुखद यात्रा नाम की ये ऐप NHAI द्वारा डेवेलप की गई है

Highlights

  • ऐप SMS से टोल प्लाज़ा के अपडेट और टोल फी की जानकारी देगी
  • ऐप में फास्टैग खरीदने के साथ खराब सड़की की शिकायत कर सकते हैं
  • सुखद यात्रा नाम की ये ऐप एनएचएआई द्वारा डेवेलप की गई है

बुधवार, 7 मार्च 2018 को यूनियन मिनिस्टर नितिन गडकरी ने एक नई मोबाइल एप्लिकेशन -ऐप- लॉन्च की है और ये ऐप उन लोगों के लिए है जो लगातार हाईवे पर वाहन चलाते हैं. जैसे ही चालक नेशनल हाईवे पर पहुंचता है तो ये ऐप एसएमएस के द्वारा टोल प्लाज़ा पर लगने वाला समय और टोल शुल्क की जानकारी मुहैया कराता है. नई ऐप में यह भी प्रावधान है कि इसमें चालक रोड क्वालिटी की शिकायत भी कर सकते हैं और हाईवे पर किसी एक्सिडेंट की जानकारी या किसी सड़कों के खड्ढों की जानकारी भी यहीं दे सकते हैं. इस ऐप के ज़रिए फास्टैग टैग भी खरीद सकते हैं और आगे उपलब्ध कराई जाने वाली कई सुविधाओं का फायदा भी उठा सकते हैं.
 
nhai sukhad yatra app
ऐप में फास्टैग खरीदने के साथ खराब सड़की की शिकायत कर सकते हैं
 
सुखद यात्रा मोबाइल ऐप के नाम से इसे लॉन्च किया गया है और इसे डेवेलप नेशनल हाईवे अथॅरिटी ऑफ इंडिया या एनएचएआई ने किया है. नितिन गडकरी का मानना है कि इस मोबाइल ऐप से यात्रियों को अपने यात्रा के अनुभव को साझा करने का मौका मिलेगा, वहीं सड़क मंत्रालय को नेशनल हाईवे पर लोगों को और भी बेहतर सेवा उउपलब्ध कराने का मौका मिलेगा. सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय ने इस ऐप के साथ ही एक टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1033 भी लॉन्च किया है. इस नंबर से पूरी हाईवे में कही भी आपातकाल की स्थिति या हाईवे से संबंधित जानकारी दी जा सकेगी. इसके लिए आथॅरिटी ने कई आपातकालीन सेवाओं को एकत्रित किया है जिसमें एंबुलेंस और टो करने की सेवा आपातकाल की स्थिति में बहुत ही कम समय में दी जा सकेगी.

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मिनिस्ट्री ने इसके अलावा कमसकम 1 मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर हर राज्य के हर जिले और केंद्र शासित प्रदेशों में खोलने का प्लान बनाया है. इसके निर्माण का उद्देश्य रोजगार निर्माण करना और भारी वाहनों के साथ हल्के वाहनों के ड्राइवर्स की मांग की पूर्ती करना है. इसमें सड़क सुरक्षा को लेकर लागों को जागरुक बनाना और खतरनाक और हानिकारक सामान लाने ले जाने वाले ड्राइवर्स को ट्रेनिंग भी दी जाएगी. जो भी एजेंसियां ऐसे सेंटर्स को खोलने में दिलचस्पी रखती हैं उन्हें मूलभूत सुविधाएं जैसे ज़मीन, क्लासरूम, सिम्युलेटर्स आदि उन्हें ही मुहैया करानी होगी. सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय ने इसके लिए 1 करोड़ रुपए तक आर्थिक मदद देने की बात कही है और इसतनी ही राशि एजेंसी द्वारा लगाने की भी बात कही गई है.
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